तेरी तमन्ना छोड़ दी, अब तेरा इरादा छोड़ दिया। एक बार फिर खुद को आधा-अधूरा छोड़ दिया, कई अवसरवादी चेहरे आपके द्वार पर आ रहे हैं तेरे घर का रास्ता हमने खुद्दारी में छोड़ दिया, मेरे प्यार का ′…
गिनती तो हो रही है शरीर की, कितने मरे ? कब गिनती होगी जमीर की, कितने मरे? गिनती तो रही है शरीर की, कितने मरे? कब गिनती होगी जमीर की, कितने मरे? कोई तो जोड़कर बताओ कितने जमीर मरे? जिसके चलते ना जाने कितने शरीर मरे। लालच के खातिर कौन कितने बार मरे? एक बार मर जाता तो आंखों में आंसू होते। जब भी देखा क्रूर नजर, वो उतने बार मरे। ये पाप की दौलत किसको कहां बचा पाया है? जोड़ लो हाथों की अंगुली पर वो कितने मरे? गिनती तो हो रही है शरीर की, कितने मरे ? कब गिनती होगी जमीर की, कितने मरे? हमीं हम हैं हर जगह सरकार और सिस्टम में सरकार नहीं संस्कार मरे पर कह…
लफ़्ज़ों के गुलदस्ते बनाऊं तो बनाऊं किसके लिये । सोचता हूं नहा कर बदलूँ कपड़े- बाल सँवारुं , मगर जाऊंगा कहां -? इस शहर में तो अब कोई ऐसा नही जिसे मिलना है मुझे जो धूप के साथी थे उनकी शाम हो चुकी या रात के अंधेरे में कहीं खो गए वो मुद्दतों से न आया न गया कोई सुनसान पड़ा है घर का आंगन कोई आने वाला भी नही अंधेरे घर मे कोई दीप जलाऊं किसके लिये लफ़्ज़ों के गुलदस्ते …
आसमान का धरती से मिलन हो रहा है बादल बनके धरती का अगन चूम रहा है भले हीं मिट जाए अस्तित्व ही उसका पर प्यार से धरती को गगन चूम रहा है ये बहकी बहकी फिजाओं में आसमान है धरती से प्यार की उसको भी गुमान है जब आता है तो अनेकों खुशियां लाता है इसलिए आज धरती को भी इंतजार है हवा आज सर्द है मौसम भी बदल रहा है Corona कैद में है पर मन मचल रहा है आसमान से धरती का मिलन हो रहा है बादल बनके धरती का अगन चूम रहा है भले ही मिट जाए अस्तित्व ही उसका पर प्यार से धरती को गगन चूम रहा है प्रस्तुति लेखेक व C A श्री अजय कुमार भगत