विदेश मंत्री चीन, वांग यी ने पत्रकार वार्ता मे बयान दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे के लिए ख़तरा नहीं, बल्कि दोस्त हैं। दोनों देश एक-दूसरे की अनदेखी नहीं कर सकते, इसलिए हमें हानी पहुँचाने वाले सारे काम रोक देने चाहिए।
- सीमा विवाद हमें विरासत में मिला है।
- सैनिकों के पीछे हटने पर कुछ नहीं कहा।
- सैनिकों की पूरण वापसी और सीमा पर शांति अवशयक ।
- दोनों देशों के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने पर बल ।
सीमा विवाद हमें विरासत में मिला है।
चीन के साथ लद्दाख के पैंगॉन्ग से सेना के डिसएंगेजमेंट के बाद अब उसके तेवर नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। विदेश मंत्री चीन, वांग यी ने पत्रकार वार्ता मे बयान दिया कि भारत और चीन एक-दूसरे के लिए ख़तरा नहीं, बल्कि दोस्त हैं। दोनों देश एक-दूसरे की अनदेखी नहीं कर सकते, इसलिए हमें हानी पहुँचाने वाले सारे काम रोक देने चाहिए। उन्होंने सपष्ट किया कि दोनों देशो के बीच सीमा विवाद हमें विरासत में मिला है, परन्तु यह दोनों देशों के सम्बंधों की पूरी कहानी नहीं है। आज की आवश्यकता यह है कि दोनों देश सभी विवादों को मिल बेठ कर सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही अपने आपसी सम्बंधों के विकास के लिए भी कार्यरत हे । डिसएंगेजमेंट के बाद यह चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत-चीन रिश्तों पर पहली टिप्पणी है।
सैनिकों के पीछे हटने पर कुछ नहीं कहा।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने आगे बताया कि चीन और भारत मित्र और सहयोगी हैं, परन्तु दोनों के बीच कुछ समस्याओं पर संदेह की स्थिति बनी है। इस स्थिति से उभरकर दोनों देशों को यह देखने की आवश्यकता है कि वे अपने आपसी सम्बंधों को किस प्रकार से आगे बढ़ा सकते हैं और द्विपक्षीय सम्बंधों को और मज़बूत बना सकते हैं। हालांकि, उन्होंने दोनों देशों के बीच 10 दौर की सैन्य स्तर की बातचीत के बाद पूर्वी लद्दाख में पैंगॉन्ग झील के उत्तरी और दक्षिणी तटों से सैनिकों के पीछे हटने पर कुछ नहीं कहा। दोनों देशों की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख में कई माह तक जारी गतिरोध के बाद उत्तरी और दक्षिणी पैंगॉन्ग क्षेत्र से अपने सैनिकों और हथियारों को हटा लिया था। इन गतिविधियों मे अभी भी कुछ बिन्दुओं पर अभी विवाद बना हुआ है।
सैनिकों की पूरण वापसी और सीमा पर शांति अवशयक ।
विदेश मंत्री भारत एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पिछले सप्ताह करीब एक घंटा 15 मिनट तक टेलीफोन द्वारा कुछ विषयों पर बातचित की थी। श्री एस जयशंकर ने वांग यी से बात चीत इस बात पर विशेष ध्यान देने को कहा था कि द्विपक्षीय सम्बंधों के विकास के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता आवश्यक है। श्री एस जयशंकर ने कहा कि गतिरोध वाली सभी स्थानो से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों पक्ष क्षेत्र से सैनिकों की पूरण वापसी और सीमा पर शांति बनाए रखने की दिशा में काम कर सकते हैं।
दोनों देशों के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने पर बल ।
इससे पूर्व पिछले दिनो ही चीन में नियुक्त भारत सरकार के राजदूत श्री विक्रम मिस्री ने चीन के उप विदेश मंत्री लुओ झाओहुई से एक भेंटवार्ता की थी । उन्होंने पूर्वी लद्दाख के शेष भागों से दोनों देशों के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था कि एसा करने से सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। साथ ही द्विपक्षीय सम्बंधों में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण भी बनेगा। दोनों देशों के सैनिकों और सैन्य साजो सामान को पैंगॉन्ग लेक एरिया से हटाने के कुछ दिनों बाद उनकी यह भेंटवार्ता हुई थी।

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