जम्मूकश्मीर में विदेशी रोहिङ्ग्या लोगों पर कार्यवाही शुरू, कठुआ हीरा नगर उप जेल में बनाया डिटेन्शन सेंटर।

 
जम्मूकश्मीर में विदेशी रोहिङ्ग्या लोगों पर कार्यवाही शुरू, कठुआ हीरा नगर उप जेल में बनाया डिटेन्शन सेंटर।

जम्मूकश्मीर मे आवेध रूप से रेह रहे सभी रोहिंग्याओं की बसतियों को सूचित किया गया हे की अपने कागज़ पत्र लेकर एम ए स्टेडियम पहुँचे जहाँ उनकी जांच होगी। जम्मू का एम ए स्टेडियम रोहिंग्याओं के लिए जांच पड़ताल का केंद्र बनाया गया हे। इस संबंध मे कार्यवाही शुरू हो चुकी हे की आवेध रूप से रेह रहे यह रोहिङ्ग्या कब जम्मूकश्मीर आकर बस गए हे । क्या इन मे से किसी के पास कोई कागज़ पत्र भी हे या इनके बीच कुछ देश के दुश्मन जासूस भी रेह रहे हे ।  

जम्मूकश्मीर पुलिस विभाग की ओर से रोहिंग्याओं लोगों पर लगातार नज़र रखी जा रही है कि कहीं यह लोग अपनी बस्तियाँ छोड़कर जम्मूकश्मीर से भाग न जाएँ।

  • जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र के नागरिकों ने शुरू से ही इन का विरोध किया था। 
  • जम्मूकश्मीर के कठुआ जिले की हीरानगर उप जेल में बनाया गया हे डिटेंशन सेंटर । 
  • जम्मूकश्मीर मे इन रोहिंग्या बसतियों के आस पास की सड़कें बिल्कुल सुनसान हें।
  • रोहिंग्याओं के सहायको जो जम्मूकश्मीर के हे उन पर भी शिकंजा कसने की तेयारी।
  • 40 से 50 लोग बस गए थे जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र मे अब इनकी गिनती हजारों मे हे।

जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र के नागरिकों ने शुरू से ही इन का विरोध किया था। 

जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से विदेशी रोहिङ्ग्या समुदाय आवेध रूप से रेह रहे थे, जम्मू के नागरिकों ने शुरू से ही इसका विरोध किया था। इस समस्या के लिए जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र के सभी नागरिकों ने बहुत संघर्ष किया हे ओर अब जाकर सरकार नींद से जागी हे ओर जम्मूकश्मीर मे कार्यवाही शुरू की हे। सर्व प्रथम इन समुदायों में उन लोगों की पहचान की जा रही हे जिनके पास कोई भी प्रमाण पत्र नहीं हे, जिनके पास म्यमार या विषव के किसी भी संस्था का कुछ भी हे उनको अभी कुछ नहीं कहा जा रहा हे। जम्मूकश्मीर मे 200 से 300 लोगों को इस कार्यवाही के अनुसार पकड़ा हे ओर उन्हे हीरा नगर जेल भेजा हे।

जम्मूकश्मीर के कठुआ ज़िले की हीरानगर उप जेल में बनाया गया हे डिटेंशन सेंटर । 

जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र में रोहिंग्याओं की बसतियों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई हे। सभी बस्तियों के बाहर जम्मूकश्मीर पुलिस कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई हे। जम्मू क्षेत्र के कठुआ जिले की हीरानगर उप जेल में बने डिटेंशन सेंटर में भीतर ओर बाहर भी सख्त पहरा लगाया गया हे। जम्मूकश्मीर की सभी रोहिंग्याओं की बसतियों को सूचित किया गया हे की अपने कागज़ पत्र लेकर एम ए स्टेडियम पहुँचे जहाँ उनकी जांच होगी। जम्मू का एम ए स्टेडियम रोहिंग्याओं के लिए जांच पड़ताल का केंद्र बनाया गया हे, ओर पिछले कुछ दिनो से यहा जांच का काम चल रहा हे। जम्मूकश्मीर के इस स्टेडियम के भीतर बाहर भी सुरक्षा कड़ी की गयी हे।

जम्मूकश्मीर मे इन रोहिंग्या बसतियों के आस पास की सड़कें बिल्कुल सुनसान हें।

जम्मूकश्मीर के क्षेत्र जम्मू में इस के विरोध में भठिंडी इलाके के रोहिंग्या नागरिक बस्तियों से निकलकर पैदल ही म्यांमार के लिए निकल पड़े थे, तभी जम्मूकश्मीर पुलिस के करामचरियों ओर अधिकारियों ने उनको समझा भुजा कर वापस बस्ती में भेजा हे । रोहिंग्याओं की इन बसतियों में भठिंडी और नरवाल क्षेत्र में रोहिंग्या बसतियों के आस पास की सड़कें बिल्कुल सुनसान हें। रोहिंग्या अपने ही अस्थायी बस्तियों में बेठे रहे। बस्तियों के बाहर से गेट पर ताला लगा रहा। यह ताला स्वयं रोहिंग्याओं ने लगाया था या फिर ज़मीन के मालिक लगाया था यह स्पष्ट नहीं हो सका। सड़कों पर सन्नाटा तो रहा लेकिन जम्मूकश्मीर पुलिसकर्मी गश्त लगाते नज़र आ रहे थे। त्रिकुटा नगर, नरवाल और भठिंडी की रोहिंग्या बस्तियों का भी हाल एसा ही था। जम्मूकश्मीर पुलिस विभाग की ओर से रोहिंग्याओं लोगों पर लगातार नज़र रखी जा रही है कि कहीं यह लोग अपनी बस्तियाँ छोड़कर भाग न जाएँ। रोहिंग्या सब्जी बेचने के करोबार से लेकर कई प्रकार के कारोबार करते हैं। जम्मू के नरवाल में सड़क के किनारे-किनारे फल ओर सब्जी की रेहड़ियाँ और बर्मा मार्केट के नाम से सूखी मछलियों का कारोबार करते हैं। रात को सड़कों पर गुब्बारे बेचने इस समुदाय की महिलाओं को देखा जाता हे।

रोहिंग्याओं के सहायको जो जम्मूकश्मीर के हे उन पर भी शिकंजा कसने की तेयारी।

जम्मूकश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं के विरुद्ध इस कार्यवाही के बाद अब इनके सहायको जो जम्मूकश्मीर के नागरिक हे उन पर भी शिकंजा कसने की तेयारी हो रही हे। इनकी सहायता करने वाले एनजीओ, व्यक्तिगत लोगों, धर्म प्रचारकों की जांच की तैयारी जम्मूकश्मीर सरकार ने कर ली है। जम्मूकश्मीर से प्राप्त समाचारो के अनुसार सूत्रों ने बताया कि इनके सहायको की पहचान कर ली गई है। जो इन रोहिंग्याओं नागरिकों को पढ़ाई लिखाई और खाने-पीने के सामान के रूप में सहायता करते रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन जम्मूकश्मीर की संस्थाओं को विदेशी लोगों की सहायता मिलती रही है। इनके बच्चों को आस-पास के मदरसे में भेजने के साथ ही बस्तियों में भी पढ़ाई लिखाई कराई जाती थी। जम्मूकश्मीर मे कट्टरता का पाठ पढ़ाने का भी शक है। 45-50 रोहिंग्याओं को यहाँ लाकर बसाया गया था अब इनकी गिनती हजारो मे हे। 

40 से 50 लोग बस गए थे जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र मे अब इनकी गिनती हजारों मे हे।

जम्मूकश्मीर से आने वाले समाचारो के अनुसार जम्मूकश्मीर की कुछ संस्थाओं की पृष्ठभूमि, ओर उनके बैंक खाते तथा आडिट रिपोर्ट की भी जांच की जाएगी। इससे सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि बठिंडी और सुजुवां इलाके में सबसे पहले किस NGO ने 45-50 रोहिंग्याओं को जम्मूकश्मीर के जम्मू क्षेत्र मे लाकर बसाया था। किस कारण इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई। जम्मूकश्मीर के जम्मू के बाहरी क्षेत्रों में 30 से अधिक स्थानों पर इन्होंने अपनी बसतियों को बसाया हे। इनमें सुजुवां तथा नगरोटा जैसे क्षेत्र भी हैं जहाँ से सैन्य प्रतिष्ठान की दूरी बहुत अधिक नहीं है, ओर इन सैनिक प्रतिष्ठानो के आस पास इनकी बसतियों को बसने में जम्मूकश्मीर से किसने सहयोग किया हे। 

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