गुलाम नबी आज़ाद ओर भा जा पा का आकर्षण राजनीति मे नया समीकरण ।

गुलाम नबी आज़ाद ओर भा जा पा का आकर्षण राजनीति मे नया समीकरण ।


अनुभवी, ईमानदार ओर साफ छवि वाले नेता की हर पार्टी मे आवश्यकता होती हे ओर इसी कारण भा जा पा प्रयास कर रही हे की जम्मूकश्मीर को स्वछ नेता प्रदान किया जाए या देश के लिए उपराष्ट्रपति तेयर किया जाए ।  

  • राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आकर्षण भड़ा ।
  • प्रधान मंत्री श्री नरेंदर मोदी की सराहना के कारण आकर्षण उत्पन्न हुआ ।
  • केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के संग मंच पर उपसितिथि देखी गयी । 
  • राज्यसभा में दोबारा लाने की दिशा में पार्टी स्तर पर कोई पहल नहीं हुई 
  • मुख्यमंत्री जामुकश्मीर या राष्ट्रपति भारत पद ग्रहण करने के अनुमान लगाए जा रहे हे । 

राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आकर्षण भड़ा । 

कांग्रेस में स्वयं को उपेक्षित अनुभव कर रहे जम्मूकश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्री गुलाम नबी आजाद की भाजपा से बढ़ती नजदीकियाँ कांग्रेस को बेचैन कर रही हैं। यह भी सत्य हे की उन्होने भाजपा में आने से इन्कार कर चुके हों, लेकिन राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह लगातार भाजपा नेताओं के साथ दिखाई दे रहे हैं। भाजपा नेता भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनका गुणगान करते नज़र आते हैं। 

प्रधान मंत्री श्री नरेंदर मोदी की सराहना के कारण आकर्षण उत्पन्न हुआ । 

पिछले दिनो नई दिल्ली में हो रहे एक कार्यक्रम में उनकी भाजपा नेताओं संग उपस्थिति ने इस मुद्दे को फिर हवा दे दी हे। राज्यसभा में श्री गुलाम नबी आजाद और अन्य सदस्यों के लिए विदाई भाषण के में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनकी खुलकर सराहना करने के बाद से ही कयास लगने आरंभ हो गए थे। हालांकि श्री गुलाम नबी आजाद ने सामने आकर भाजपा में जाने की अटकलों पर विराम लगा दिया था।

केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के संग मंच पर उपसितिथि देखी गयी । 

अब पिछले दिनो नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में आजाद की केंद्रीय मंत्रियों मुख्तार अब्बास नकवी और जितेंद्र सिंह के संग मंच पर उपसितिथि ने फिर एक बार इन चर्चाओं को हवा दे दी हे। सरकारी तौर पर आयोजित उर्दू मुशायरे में आजाद के पोस्टर बहुत से प्रश्नो के स्वयं उत्तर दे रहे थे और कई नए प्राशन पैदा भी कर रहे थे। वह कार्यक्रम में मंत्रियों के साथ ही बैठे और इसीलिए सबके आकर्षण का केंद्र भी रहे। कार्यक्रम भले ही सरकार द्वारा आयोजित किया गया था लेकिन चर्चा में केवल आजाद ही थे। मुशायरे में बड़े बड़े शायर अपनी शायरी पेश करते करते अधिक बार आजाद का नाम ले रहे थे । 

राज्यसभा में दोबारा लाने की दिशा में पार्टी स्तर पर कोई पहल नहीं हुई । 

भले ही कांग्रेस नेता इस टिप्पणी करने से बचें पर पार्टी में खलबली साफ़ तौर पर महसूस की जा रही है। कभी गांधी परिवार के करीब रहे आजाद को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद संगठन में महतवपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। अब राज्यसभा का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद भी उन्हें फिर से राज्यसभा में लाने की दिशा में पार्टी स्तर पर कोई पहल नहीं हुई है। कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खडग़े को आजाद के स्थान पर राज्यसभा में विपक्ष का नेता बना दिया है । श्री गुलाम नबी आजाद इस समय कांग्रेस में स्यम को असहज अनुभव कर रहे हैं । पिछले दिनों मे उन्होंने यह भी कहा था कि अब उन्हें पार्टी में किसी पद की कोई अभिलाषा नहीं रही । इसके बाद से भाजपा से उनकी नजदीकियाँ लगातार बढ़ रही हैं । 

मुख्यमंत्री जम्मूकश्मीर या उप राष्ट्रपति भारत पद ग्रहण करने के अनुमान लगाए जा रहे हे । 

अनुमान लगाए जा रहे हैं कि श्री गुलाम नबी आजाद आने वाले समय में भाजपा के समर्थन से देश के उपराष्ट्रपति पद ग्रहण कर सकते हैं । जम्मूकश्मीर में आजाद के समर्थक भी मान चुके हैं कि की कांग्रेस में पारी लगभग समाप्त हो चुकी है। वह कुछ बोलने से कतराते हैं क्योंकि अंतिम फ़ैसला आजाद को ही लेना है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पत्रकारों को बताया कि आजाद जम्मू कश्मीर में आधार रखते हैं। श्री गुलाम नबी आजाद अधिक अनुभवी नेता हैं। अतः भाजपा नेता पूरा प्रयास कर रहें हे है कि वह श्री गुलाम नबी आजाद के राजनीतिक अनुभव का प्रयोग करके जम्मू कश्मीर में अपना आधार दृढ कर सकें।

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